जीवन में जगाती प्रल्हाद-सा आल्हाद : होली

जीवन में जगाती प्रल्हाद-सा आल्हाद : होली      - पूज्य बापूजी   संस्कृत में संधिकाल को पर्व बोलते है | जैसे सर्दी पूरी हुई और गर्मी शुरू होने की अवस्था संधिकाल है | होली का पर्व इस संधिकाल में आता है | वसंत की जवानी ( मध्यावस्था ) में होली…

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ब्रम्हवृक्ष पलाश

ब्रम्हवृक्ष पलाश पलाश को हिंदी में ढ़ाक, टेसू, बंगाली में पलाश, मराठी में पळस, गुजराती में केसुडा कहते है | इसके पत्त्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी – पात्र में किये भोजन तुल्य लाभ मिलते है | ‘लिंग पुराण’ में आता है कि पलाश की समिधा से…

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