गंगा गौरव गान

भारतीय संस्कृति में कलिमलनाशिनी गंगा की अपार महिमा है । प्राचीन मनीषियों ने इससे प्रभावित होकर अपनी भाव-पुष्पांजलियाँ विभिन्न स्वरूपों में अर्पित कर स्वयं को कृतकृत्य किया है । 'श्रीमदभागवत महापुराण' में गंगाजी राजा भगीरथ से प्रश्न करती है :  किं चाहं न भुवं यास्ये नरा मय्यामृज्न्त्यघम  | मृजामि तदघं…

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