संत तुलसीदासजी जयंती- २२ अगस्त २०१५

संत तुलसीदासजी जयंती संतों ने एक स्वर से घोषणा की है कि जीव का परम पुरुषार्थ एकमात्र भगवद्प्रेम ही है । शेष जो चार पुरुषार्थ हैं, उनमें किसी-न-किसी रूप में ‘स्व' सर्वथा लगा ही रहता है । एक भगवद्प्रेम ही ऐसा है जिसमें ‘स्व' भी सर्वथा समर्पित हो जाता है,…

Continue Reading संत तुलसीदासजी जयंती- २२ अगस्त २०१५

संत की करें जो निंदा, उन्हें होना पडे शर्मिंदा

संत की करें जो निंदा, उन्हें होना पडे शर्मिंदा (संत तुलसीदासजी जयंती) संत तुलसीदासजी काशी में प्रवचन करते थे । दूर-दूर तक उनकी ख्याति फैल चुकी थी । कहते हैं जहाँ गुलाब वहाँ काँटें, जहाँ चंदन वहाँ विषैले सर्प, ऐसे ही जहाँ सर्वसुहृद लोकसंत वहाँ निंदक -कुप्रचारकों का होना स्वाभाविक…

Continue Reading संत की करें जो निंदा, उन्हें होना पडे शर्मिंदा

End of content

No more pages to load