मुक्‍ति और आत्‍मसाक्षात्‍कार एक ही है या अलग-अलग है – पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

मुक्‍ति और आत्‍मसाक्षात्‍कार एक ही है या अलग-अलग  है - पूज्य संत श्री आशारामजी बापूमुक्‍त का मतलब है बंधनों से मुक्‍त होना और दुखों से मुक्‍त होना । दुखों से मुक्‍त.... आत्‍मसाक्षात्‍कार के बिना हुआ नहीं जाता । परमात्‍मा की प्राप्‍ति कहो, मुक्‍ति कहो एक ही बात है । मुक्‍ति…

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भगवान ने जगत क्‍यों बनाया ? – पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

 भगवान ने जगत क्‍यों बनाया ? - पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ये संसार भगवान ने पुजवाने के लिये नहीं बनाया, जैसे नेता वोट बैंक के लिये अपने एरिया में घूमता है ऐसे भगवान सृष्‍टि करके अवतार लेकर वोट बैंक के लिये नहीं आते अथवा वोट बैंक के लिये भगवान ने ये…

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पूज्य आसाराम बापूजी के साथ प्रश्न और उत्तर

Question & Answer with Pujaya Bapuji पूज्य आसाराम बापूजी के साथ प्रश्न और उत्तर १] मंत्र के अर्थ में प्रीति कैसे हो ?अर्थ प्रेमस्वरुप ही तो है | बार-बार जपे, बार–बार अर्थ में गोते मारे तो प्रीति बढती है | २] ध्यान में मन नहीं लगता | कुसंगति  से कैसे बचें…

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Spiritual Question – Answer Session

इस सत्संग के मुख्यअंश -  • संसार नश्वर है, मिथ्था है , यह सत्संग में सुनने मिलता है, फिर भी संसार में मन क्यों भागता है ? • दिन भर हम सुमिरन करते है फिर भी मन क्यों भटकता है ? • जब प्राणायम क्रिया /ध्यान क्रिया होती है तब…

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