ऋषि प्रसाद – सेवा तो सेवा ही है !

सेवा तो शबरी की है, सेवा तो राम जी की है, सेवा तो श्रीकृष्ण की है, सेवा तो कबीर जी की है और सेवा तो ऋषि प्रसाद वालों की है, अन्य सेवकोकं की है। ( पूज्य बापू जी की पावन अमृतवाणी ) सेवक को जो मिलता है वह बड़े-बड़े तपस्वियों…

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अनोखी गुरुदक्षिणा

महर्षि अगस्त्यजी के शिष्य सुतीक्ष्ण गुरु-आश्रम में रहकर अध्ययन करते थे | विद्याध्ययन समाप्त होने पर एक दिन गुरूजी ने कहा : “बेटा ! तुम्हारा अध्ययन समाप्त हुआ | अब तुम विदा हो सकते है |” सुतीक्ष्ण ने कहा : “गुरुदेव ! विद्याध्ययन के बाद गुरूजी को गुरुदक्षिणा देनी चाहिए…

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