गरुड़पुराण – अध्याय – १०१

| ॐ श्रीपरमात्मने नम: | ॐ श्री गणेशाय नम: | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | गरुडपुराण आचारकाण्ड अध्याय – १०१ ग्रहशान्ति – निरूपण याज्ञवल्क्यजी ने कहा – हे मुनियों ! लक्ष्मी एवं सुख-शान्ति के इच्छुक तथा ग्रहों की दृष्टी से दु:खित जनों को ग्रहशान्ति के लिये तत्सम्बन्धित यज्ञ करना चाहिये…

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शिवपुराण – १८६

श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नम : ॐ श्री गणेशाय नम: भवाब्धिमग्नं दिनं मां समुन्भ्दर भवार्णवात | कर्मग्राहगृहीतांग दासोऽहं तव् शंकर || श्री शिवपुराण - माहात्म्य रूद्रसंहिता, पंचम ( युद्ध ) खंड अध्याय – १८६ दुन्दुभिनिर्ह्लाद नामक दैत्य का व्याघ्ररूप से शिवभक्तपर आक्रमण करने का विचार और शिवद्वारा उसका वध सनत्कुमारजी कहते है –…

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विष्णुपुराण – चतुर्थ अंश – १

ॐ श्री मन्नारायणाय नम: नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम | देवी सरस्वती व्याप्तं ततो जयमुदिरयेत || श्रीविष्णुपुराण चतुर्थ अंश अध्याय – पहला वैवस्वतमनु के वंश का विवरण श्रीमैत्रेयजी बोले – हे भगवन ! सत्कर्म ने प्रवृत्त रहनेवाले पुरुषों को जो करने चाहिये उन सम्पूर्ण नित्य-नैमित्तिक कर्मों का आपने वर्णन कर…

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शिवपुराण – १८५

श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नम : ॐ श्री गणेशाय नम: भवाब्धिमग्नं दिनं मां समुन्भ्दर भवार्णवात | कर्मग्राहगृहीतांग दासोऽहं तव् शंकर || श्री शिवपुराण - माहात्म्य रूद्रसंहिता, पंचम ( युद्ध ) खंड अध्याय – १८५ गजासुर की तपस्या, वर-प्राप्ति और उसका अत्याचार, शिवद्वारा उसका वध, कृत्तिवासा नामसे विख्यात होना तथा कृत्तिवासेश्वर – लिंग की…

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