ब्रह्मपुराण अध्याय – ७३

|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || ब्रह्मपुराण अध्याय – ७३ श्रीब्रह्मपुराण की महिमा तथा ग्रन्थ का उपसंहार लोमहर्षणजी कहते हैं – द्विजवरो ! इसप्रकार पूर्वकाल में महर्षि व्यासने सारभूत निर्दोष वचनोंद्वारा मधुरवाणी में मुनियों को यह पुराण सुनाया था | इसमें अनेक शास्त्रों के शुद्ध एवं निर्मल सिद्धांतों का समावेश…

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ब्रह्मपुराण अध्याय – ७२

|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || ब्रह्मपुराण अध्याय – ७२ योग और सांख्य का वर्णन व्यासजी कहते हैं – जिस प्रकार दुर्बल मनुष्य पानी के वेग में  बह जाता हैं , उसीप्रकार निर्बल योगी विषयों से विचलित हो जाता हैं | किन्तु उसी महान प्रवाह को जैसे हाथी रोक देता…

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ब्रह्मपुराण अध्याय – ७१

|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || ब्रह्मपुराण अध्याय – ७१ आत्यंतिक प्रलय का निरूपण, आध्यात्मिक आदि त्रिविध तापों का वर्णन और भगवत्तत्त्व की व्याख्या व्यासजी कहते हैं – ब्राह्मणों ! आध्यात्मिक आदि तीनों तापों को जानकर ज्ञान और वैराग्य उत्पन्न होनेपर विद्वान आत्यंतिक लय प्राप्त होते हैं | आध्यात्मिक ताप…

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ब्रह्मपुराण अध्याय – ७०

|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || ब्रह्मपुराण अध्याय – ७० युगांतकाल की अवस्था का निरूपण मुनियों ने कहा – धर्मज्ञ ! हमलोग धर्म की लालसा से अब उस कलिकाल के समीप आ पहुँचे हैं, जब कि स्वल्प कर्म के द्वारा हम सुखपूर्वक उत्तम धर्म को प्राप्त कर सकते हैं |…

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