गरुड़पुराण – अध्याय – १०१

| ॐ श्रीपरमात्मने नम: | ॐ श्री गणेशाय नम: | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | गरुडपुराण आचारकाण्ड अध्याय – १०१ ग्रहशान्ति – निरूपण याज्ञवल्क्यजी ने कहा – हे मुनियों ! लक्ष्मी एवं सुख-शान्ति के इच्छुक तथा ग्रहों की दृष्टी से दु:खित जनों को ग्रहशान्ति के लिये तत्सम्बन्धित यज्ञ करना चाहिये…

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