गुरुवर का दर्शन

asharam bapu, jogire
Bapuji ke virah me

अति शीघ्र ऐसे दिन आए।
अति शीघ्र, ऐसे दिन आएं
जब गुरुवर का दर्शन ,पाएं
छलके मनवा आनंद उमंग से
जब सदगुरु को, सन्मुख पाएं ।
वरराजा बिन , जैसे बारात ,
हो चंद्र बिना अंधियारी रात,
सूना तरु बिन फुल फल पाँत,
गुरु दर्शन बिन , चित चैन न पाए।
जैसे प्राण बिन, निर्जीव हो तन
गुरुज्ञान बिना ,सूना चितवन
प्रभूप्रेम बिना , सूना मन मधुबन
गुरु बिन कौन करुणा बरसाए ?

जैसे नेत्रज्योति बिन सूने नयन
स्वास बिना , जैसे धडकन
मन वीणा बिन , जैसे गुंजन
गुरुदर्शन बिन ,नैना नीर बहाए ।
जैसे माली बिन मुर्झाया चमन
हो अस्त व्यस्त बिखरा गुलशन
नीरव आश्रम , उदास जन जन
गुरु बिन , दिलदीप ,कौन जगाए ?

सद्गुरु सुहृदय , रक्षक पितुमाता
दिनबंधु करुणामय दाता
जोडा जिसने हरि से नाता ,
गुरु बिन कौन अलख लखाए ?