• Post category:Ekadashi
Nirjala Ekadashi 2021: Date, Vrat Vidhi, Katha, Mahatmya, Parana

Nirjala Ekadashi 2021: Date, Vrat Vidhi, Katha, Mahatmya, Parana

Nirjala Ekadashi Date 2021

  • 21 जून 2021, सोमवार

How to do Nirjala Ekadashi Vrat? [Nirjala Ekadashi Vrat Kaise Rakhe]

  • सुबह सूर्योदय से पहले- पहले भरपेट पानी पी लें ।
  • अगर घर मे देशी गाय का घी है तो सूर्योदय से पहले ही 25 से 50 ग्राम गुनगुने पानी के साथ ले लें । इससे भूख-प्यास की उग्रता कम होगी, व्रत करने में आसानी होगी ।
  • सूर्योदय से पहले नींबू व मिश्री मिलाकर पानी पी ले तो प्यास कम लगेगी ।
  • दोपहर या शाम के समय मुल्तानी मिट्टी शरीर पर लगाकर आधा या एक घंटे रखकर स्नान करें तो प्यास नहीं सताएगी । मुल्तानी में अगर पलाश के पाउडर अथवा छाछ, नींबू मिला ले अथवा इसमे से कोई भी एक चीज मिला ले तो प्यास नहीं सताएगी ।
  • अनावश्यक घर से बाहर न जाये, भागदौड़ न करें जिससे पसीना न बहे । जितना कम पसीना बहेगा उतनी प्यास कम लगेगी, सम्भव हो तो मौन रखें, जप ध्यान करें , सत्संग सुनें , शास्त्र पढ़ें ।

Nirjala Ekadashi Mahatmya [Importance of Nirjala Ekadashi Fast]

  • राजा युधिष्ठिर ने पूछा : “जनार्दन ! ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के व्रत की क्या महिमा है ? “
  • भगवान श्रीकृष्ण ने कहा : “वेद की शब्द राशि का वर्गीकरण करनेवाले और 18 पुराणों के रचयिता भगवान वेदव्यासजी के होते हुए मैं तुमको क्या एकादशी का माहात्म्य सुनाऊँ ? व्यासजी को हम प्रार्थना करते हैं कि वे संतपुरुष हमको सत्संग सुनायें ।” भगवान भी संतपुरुष का सत्संग सुनने का महत्त्व जानते हैं ।
  • व्यासजी कहते हैं : “मनुष्य को दोनों पक्षों की एकादशी का व्रत करना ही चाहिए । और व्रत न कर सके तो गृहस्थी को शुक्ल पक्ष की बारह एकादशियाँ और चतुर्मास के कृष्ण पक्ष की चार एकादशियाँ तो अवश्य अवश्य करनी चाहिए । जो व्रत नहीं करता, पशु की नाईं सब दिन खाता है, वह पाशवी योनियों में जाता है और नरकों के दुःख भोगता है। सर्व दोषों को हरनेवाली, भगवद्भक्ति भरनेवाली और अन्न-जल की आदत से बँधे जीवों को अपनी आत्ममस्ती व बल में लानेवाली एकादशी का व्रत तो सभीको करना चाहिए । राजन् ! जननाशौच और मरणाशौच में भी एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए ।”
  • इतने में भीम बोल पड़े : “व्यास भगवान ! युधिष्ठिर महाराज तो एकादशी करते हैं, मेरी कुंती माता तथा द्रौपदी, भैया अर्जुन, नकुल, सहदेव भी करते हैं लेकिन मैं एक बार पेटभर भोजन कर लूँ, फिर भी कोई मुझसे कहे कि ‘अब एकादशी करो’ तो मैं नहीं कर सकता । मेरे पेट में वृक नाम की अग्नि ऐसी है कि न खाऊँ तो कुछ-का-कुछ हो जाता है । इसलिए महामुने! मैं वर्षभर में केवल एक ही उपवास कर सकता हूँ । तो मेरे जैसों का उद्धार कैसे होगा ?”
  • व्यासजी : “पुत्र ! ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में निर्जला एकादशी होती है। इसका यत्नपूर्वक निर्जल व्रत रखने से मनुष्य निर्दोष नारायण की भक्ति और कृपा पाने तथा निरोग रहने में सक्षम हो जाता है ।
  • नारकीय यातनाओं से अगर तुम बचना चाहते हो और पशु-योनियों से अपनी रक्षा करना चाहते हो तो यत्नपूर्वक निर्जला एकादशी के दिन उपवास करो ।

Nirjala Ekadashi Vrat Vidhi

  • इस दिन कुल्ला या आचमन के सिवाय किसी प्रकार का जल मुख में न डाले, अन्यथा व्रत भंग हो जाता है । एकादशी को सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन के सूर्योदय तक मनुष्य जल का त्याग करे तो यह व्रत पूर्ण होता है । द्वादशी को प्रभातकाल में स्नान आदि सब कार्य पूरे करके भोजन करे । वर्षभर में जितनी एकादशियाँ होती हैं, उन सबका फल निर्जला एकादशी से मनुष्य प्राप्त कर लेता है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है । भगवान केशव ने मुझसे कहा था कि ‘यदि मानव मेरी शरण में आ जाय और एकादशी को निराहार रहे तो वह सब पापों से छूट जाता है ।’
  • मेरु पर्वत के बराबर महान पाप भी इस एकादशी व्रत के प्रभाव से भस्म हो जाते हैं । जो मनुष्य इस दिन जल के नियम का पालन करता है, उसे एक-एक प्रहर में कोटि-कोटि स्वर्णमुद्राएँ दान करने का फल प्राप्त होता सुना गया है । ‘मनुष्य निर्जला एकादशी के दिन प्रातः पुण्यस्नान, दान, जप, होम आदि जो कुछ भी करता है, वह सब अक्षय होता है ।’ यह भगवान श्रीकृष्ण का कथन है। जो मनुष्य एकादशी के दिन अन्न खाता है, वह पाप का भोजन करता है । इस लोक में वह चांडाल के समान है और मरने पर दुर्गा को प्राप्त होता है । जो मनुष्य इस एकादशी को उपवास करके दान करेंगे, वे परम पद को प्राप्त होंगे ।”
  • विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें एकादशी व्रत विधि पोस्ट :- Click Here

Nirjala Ekdashi Vrat Katha

Nirjala Ekadashi Kholne Ki Vidhi [Nirjala Parana Vidhi Time]

  • दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके अपना जप का नियम करके फिर सूर्य को अर्ध्य देकर फिर व्रत खोलें ।
  • 7 भुने हुए चने को बीच से तोड़कर कुल 14 टुकड़े हाथ मे लेकर खड़े हो जाये ।
  • (14 टुकड़ों को ) पीछे फेंकते जाएं, कि मेरे समस्त पाप संतापों का नाश हो, अंतःकरण शुद्ध हो… ॐ ॐ ॐ
  • कुछ भुने हुए चने खा लें, जिससे जमा हुआ कफ चने के साथ शरीर से बाहर आ जाये ।
  • उसके बाद गुनगुने पानी मे नीबू की शिकंजी (सेंधा नमक भी अल्प मात्रा में डालें) बनाकर पियें ।
  • एक डेढ़ घण्टे बाद बहुत पतली मूँग (बगैर मिर्च मसाले के हल्दी -धनिया डालकर) अथवा मूंग का पानी एक चम्मच घी डालकर खाएं ।
  • पूरे दिन गुनगुना पानी ही पियें तो अच्छा होगा , कोई भी भारी चीज न खाएं, पूरा दिन मूँग ही खाएं तो अतिउत्तम होगा ।
  • नोट : आप स्वस्थ हैं तो निर्जला रखिये यह सर्वोत्तम होगा, आपको पूरा पुण्य भी मिलेगा, अगर आपका स्वास्थ्य /उम्र निर्जला रखने की अनुमति नही दे रहा है (आप मधुमेह, उच्च रक्तचाप के रोगी हैं) तो सजला रखिये, अगर सजला भी नहीं रख सकते तो केवल दूध पर रहिये, अगर यह भी सम्भव नहीं तो फल और दूध पर रहिये ।

FAQ

निर्जला व्रत में कोई भी फलहार नहीं लेना चाहिए ।
अपने सुविधा अनुसार अन्न, वस्त्र या कोई भी दान कर सकते है ।
22 जून सुबह 5:46 – 8:27 बजे तक
निर्जला व्रत करनेवाला व्यक्ति निरोग रहने में सक्षम हो जाता है ।
इसके लिए ऊपर दिया निर्जला एकादशी व्रत खोलने की विधि पढ़ें ।
भगवान विष्णु के लिए यह व्रत रखा जाता है और यह एकादशी व्रत करने से साल भर के एकादशीयों का पुण्य मिलता है ।
द्वादशी को सूर्योदय के बाद उपवास खोलकर पानी पी सकते हैं ।
दोपहर में सोने से आयु कम होती है । रात्रि को जल्दी सो कर प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठना चाहिए ।