श्री आशारामायण पाठ विधि

asaramayan

श्री आशारामायण विधि  –

जहाँ अनुष्ठान करने का है वो जगह ईशान कोन होना चाहिए ( पूरब और उत्तर के बीच का कोन ) उस कोने में  तुलसी का कुंडा रखे, साथ में गोझरन, हल्दी, कुंकुम, गंगाजल, शुद्ध अत्तर नहीं तो शुद्ध गुलाबजल ये पाँच चीजे लेकर उससे पूरब या उत्तर दिशा के दीवार पर समांतर भुजाओं स्वस्तिक निकालना और उसके बाजूमें याने नीचे जमीन पर पूज्य गुरुदेव का तसवीर रखना (चौरंग या पाठ पर ) बाद में जमीन पर एक सफेद वस्त्र या केशरी रंग का वस्त्र डाल देना उसके उपर गेंहू के दाने से स्वस्तिक बनाना और उस स्वस्तिक के ऊपर तांबे का कलश रखे | कलश में आम के पेड़ के पत्ते रखे उसके उपर नारियल रखे | उसके बाद खुद तीलक करके ॐ गं गणपतये नमः मन्त्र का उच्चारण करे और जिस उद्दिस्ट आपको अनुष्ठान करने का है वो संकल्प करे बाद में श्वास अंदर गया रोका  और महामृत्यंजय या गायत्री मंत्र का तीन बार उच्चारण करना | मन में संकल्प की पुनरावृति करके – “मेरा अमुक कार्य अवस्य पूरा होगा” ऐसा तीन बार मन में बोलना | अनुष्ठान जितने दिनों में पूरा करने का है उतने दिन पाठ शुरू करने से पहीले ये मंत्र बोलना और अपना संकल्प दोहरना | रोज सही संख्येमें पाठ करना (२१,२५, जितना इच्छित हो ) अनुष्ठान के टाइम धुप अगर दीप लगाना |

शुभ दिन: सोमवार, बुधवार, गुरूवार, शुक्रवार और रविवार

शुभ तिथि : दूज, तीज, पंचमी, सप्तमी, दशमी, द्वादशी और त्रयोदशी. ( २,३,५,७,१०,१२,१३)

इन बताये गये दिनों और तिथि में अनुष्ठान शुरू करने में कोई बाधा नहीं होती और हमारा संकल्प पूरा होता है

अनुष्ठान करना हो तो सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार या रविवार, इन ५ दिनों में से किसी भी दिन शुरु करें अर्थात मंगलवार और शनिवार को छोड़कर बाकी के 5 दिन शुरु करें अनुष्ठान पूरा होकर रहेगा |

अनुष्ठान पूरा होने बाद कलश का पानी तुलसी में डालना, गेंहू के दाने पक्षी को डालना , नारियल का प्रसाद बाटना नहीं तो नदी में डालना |

गुरुमंत्र के जप से १०८ आहुति देकर हवन करना और एक, दोन अगर पाँच – सात कुमारी को खाना खिलाना | अनुष्ठान में श्रध्दा,विश्वास , संयम और तत्परता रखने से अपना मनोरथ पूरा होता है |

हरि ॐ