अग्निपुराण भाग – ११६

||श्रीहरि:|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अग्निपुराण अध्याय – ११८ अग्निपुराण का माहात्म्य अग्निदेव कहते हैं – ब्रह्मन ! ‘अग्निपुराण’ ब्रह्मस्वरूप हैं, मैंने तुमसे इसका वर्णन किया | इसमें कहीं संक्षेप से और कहीं विस्तार के साथ ‘परा’ और ‘अपरा’ – इन दो विद्याओं का प्रतिपादन किया गया है | यह…

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अग्निपुराण भाग – ११५

||श्रीहरि:|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अग्निपुराण अध्याय – ११७ यमगीता अग्निदेव कहते है – ब्रह्मन ! अब मैं ‘यमगीता’ का वर्णन करूँगा, जो यमराज के द्वारा नचिकेता के प्रति कही गयी थी | यह पढने और सुननेवालों को सत्पुरुषों को मोक्ष देनेवाली हैं ||१|| यमराजने कहा – अहो ! कितने…

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अग्निपुराण भाग – ११४

||श्रीहरि:|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अग्निपुराण अध्याय – ११६ गीता – सार अब मैं गीता का सार बतलाऊँगा, जो समस्त गीता का उत्तम-से-उत्तम अंश है | पूर्वकाल में भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुन को उसका उपदेश दिया था | वह भोग तथा मोक्ष-दोनों को देनेवाला हैं ||१|| श्रीभगवान ने कहा – अर्जुन…

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अग्निपुराण भाग – ११३

||श्रीहरि:|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अग्निपुराण अध्याय – ११५ जडभरत और सौवीर-नरेश का संवाद – अद्वैत ब्रह्मविज्ञान का वर्णन अब मैं उस ‘अद्वैत ब्रह्मविज्ञान’ का वर्णन करूँगा, जिसे भरत ने (सौवीरराज को) बतलाया था | प्राचीनकाल की बात हैं, राजा भरत शालग्राम क्षेत्र में रहकर भगवान वासुदेव की पूजा आदि…

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