शिवपुराण – १८६

श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नम : ॐ श्री गणेशाय नम: भवाब्धिमग्नं दिनं मां समुन्भ्दर भवार्णवात | कर्मग्राहगृहीतांग दासोऽहं तव् शंकर || श्री शिवपुराण - माहात्म्य रूद्रसंहिता, पंचम ( युद्ध ) खंड अध्याय – १८६ दुन्दुभिनिर्ह्लाद नामक दैत्य का व्याघ्ररूप से शिवभक्तपर आक्रमण करने का विचार और शिवद्वारा उसका वध सनत्कुमारजी कहते है –…

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शिवपुराण – १८५

श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नम : ॐ श्री गणेशाय नम: भवाब्धिमग्नं दिनं मां समुन्भ्दर भवार्णवात | कर्मग्राहगृहीतांग दासोऽहं तव् शंकर || श्री शिवपुराण - माहात्म्य रूद्रसंहिता, पंचम ( युद्ध ) खंड अध्याय – १८५ गजासुर की तपस्या, वर-प्राप्ति और उसका अत्याचार, शिवद्वारा उसका वध, कृत्तिवासा नामसे विख्यात होना तथा कृत्तिवासेश्वर – लिंग की…

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शिवपुराण – १८३ से १८४

श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नम : ॐ श्री गणेशाय नम: भवाब्धिमग्नं दिनं मां समुन्भ्दर भवार्णवात | कर्मग्राहगृहीतांग दासोऽहं तव् शंकर || श्री शिवपुराण - माहात्म्य रूद्रसंहिता, पंचम ( युद्ध ) खंड अध्याय – १८३ से १८४ श्रीकृष्णद्वारा बाण की भुजाओं का काटा जाना, सिर काटने के लिये उद्यत हुए श्रीकृष्ण को शिवका रोकना,…

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शिवपुराण – १७९ से १८२

श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नम : ॐ श्री गणेशाय नम: भवाब्धिमग्नं दिनं मां समुन्भ्दर भवार्णवात | कर्मग्राहगृहीतांग दासोऽहं तव् शंकर || श्री शिवपुराण - माहात्म्य रूद्रसंहिता, पंचम ( युद्ध ) खंड अध्याय – १७९ से १८२ बाणासुर की तपस्या और उसे शिवद्वारा वर-प्राप्ति, शिव की आज्ञा से श्रीकृष्ण का उन्हें जृम्भणास्त्रसे मोहित करके…

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