विष्णुपुराण – चतुर्थ अंश – १

ॐ श्री मन्नारायणाय नम: नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम | देवी सरस्वती व्याप्तं ततो जयमुदिरयेत || श्रीविष्णुपुराण चतुर्थ अंश अध्याय – पहला वैवस्वतमनु के वंश का विवरण श्रीमैत्रेयजी बोले – हे भगवन ! सत्कर्म ने प्रवृत्त रहनेवाले पुरुषों को जो करने चाहिये उन सम्पूर्ण नित्य-नैमित्तिक कर्मों का आपने वर्णन कर…

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विष्णुपुराण तृतीय अंश – 18

ॐ श्री मन्नारायणाय नम: नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम | देवी सरस्वती व्याप्तं ततो जयमुदिरयेत || श्रीविष्णुपुराण तृतीय अंश अध्याय – अठराहवाँ मायामोह और असुरों का संवाद तथा राजा शतधनु की कथा श्रीपराशरजी बोले – हे मैत्रेय ! तदनन्तर मायामोह ने जाकर देखा कि असुरगण नर्मदा के तटपर तपस्या में…

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विष्णुपुराण – तृतीय अंश – १३ से १७

ॐ श्री मन्नारायणाय नम: नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम | देवी सरस्वती व्याप्तं ततो जयमुदिरयेत || श्रीविष्णुपुराण तृतीय अंश अध्याय – १३ से १७ नग्नविषयक प्रश्न, देवताओं का पराजय, उनका भगवान की शरण में जाना और भगवान का मायामोह को प्रकट करना श्रीपराशरजी बोले – हे मैत्रेय ! पूर्वकाल में…

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विष्णुपुराण – तृतीय अंश – ११ से १२

ॐ श्री मन्नारायणाय नम: नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम | देवी सरस्वती व्याप्तं ततो जयमुदिरयेत || श्रीविष्णुपुराण तृतीय अंश अध्याय – ग्यारहवाँ - बारहवाँ ग्रहस्थसम्बन्धी सदाचार का वर्णन और्व बोले – गृहस्थ पुरुष को नित्यप्रति देवता, गौ, ब्राह्मण, सिद्धगण, वयोवृद्ध तथा आचार्य की पूजा करनी चाहिये और दोनों समय संध्यावन्दन…

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